Palitana 5 Chaityavandan In Hindi Full [repack] -
श्री शत्रुंजय महातीर्थ के दर्शन मात्र से ही जीव की दुर्गति का नाश हो जाता है। जो भी भव्य जीव सच्चे भाव से इस पर्वत पर पैर रखता है, प्रभु उसका संसार सागर पार करा देते हैं। यह अनंत सिद्धों की भूमि और समस्त तीर्थों का राजा है। यहाँ आदिनाथ (ऋषभदेव) प्रभु ने 99 बार समवशरण कर अपने चरण स्थापित किए हैं Tattva Gyan।
"हे प्रभु! अब मुझे कुछ नहीं चाहिए। न सुख, न दुख, न यश, न अपयश। बस आपके चरणों में लीन हो जाना है। यह मेरी अंतिम वंदना है।"
आउरियाए चाउरियाए, देउलियाए चिट्ठिआणं। छप्पि आसण पडिमाणं, णमो णमो वंदामि णिच्चं। palitana 5 chaityavandan in hindi full
"हे शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र! आपके दर्शन मात्र से दुर्गति का नाश होता है। जो भी भव्य जीव भावपूर्वक इस पर्वत पर चढ़ता है, वह संसार सागर से पार उतर जाता है।" Tattva Gyan
"पालीताना के पाँच चैत्यवंदन- मानो पाँच अमृत घूँट, जो आत्मा को अमर बना दें।" This link or copies made by others cannot be deleted
इन 5 ऊर्जावान स्थानों पर ध्यान लगाने से तनाव दूर होता है।
जैन धर्म के सबसे पवित्र महातीर्थ शत्रुंजय गिरिराज (पालीताना, गुजरात) की भावपूर्ण यात्रा का मुख्य आधार है Tattva Gyan । मान्यता है कि शत्रुंजय पर्वत के कण-कण में अनंत सिद्ध आत्माओं का वास है। पालीताना की प्रसिद्ध 99 यात्रा या सामान्य गिरिराज वंदना के दौरान मुख्य रूप से 5 विशेष स्थानों पर रुककर चैत्यवंदन (देव-वंदना) करने का विधान है Tattva Gyan Jainsite । Try again later
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